श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.109.10 
सत्यमेवानृशंसं च राजवृत्तं सनातनम्।
तस्मात् सत्यात्मकं राज्यं सत्ये लोक: प्रतिष्ठित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सत्य का पालन ही राजाओं का दयालु धर्म है - यही सनातन आचरण है, अतः राज्य सत्य का स्वरूप है। सम्पूर्ण जगत् सत्य में स्थित है॥10॥
 
'The observance of truth is the compassionate religion of kings - it is the eternal conduct, hence the kingdom is the embodiment of truth. The entire world is established in truth.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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