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ramayan 2.108.8: 'तुम्हें समृद्ध अयोध्या का राजा बनना चाहिए। वह नगरी अपने सिर पर एक चोटी बाँधे तुम्हारा इंतज़ार कर रही है, जैसे कोई स्त्री अपने पति से प्रेम करती हो।'   |   ramayan सर्ग 2.108: जाबालि का नास्तिकों के मत का अवलम्बन करके श्रीराम को समझाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.108.8 
समृद्धायामयोध्यायामात्मानमभिषेचय।
एकवेणीधरा हि त्वा नगरी सम्प्रतीक्षते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हें समृद्ध अयोध्या का राजा बनना चाहिए। वह नगरी अपने सिर पर एक चोटी बाँधे तुम्हारा इंतज़ार कर रही है, जैसे कोई स्त्री अपने पति से प्रेम करती हो।'
 
‘You should get yourself anointed as the king of the prosperous Ayodhya. That city is waiting for you with one braid tied around its head like a woman who is loved by her husband.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)