Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.108.5-6: जैसे कोई व्यक्ति दूसरे गाँव में जाते समय एक रात धर्मशाला में ठहरता है और अगले दिन उसे छोड़कर अपने अगले गंतव्य स्थान पर चला जाता है, वैसे ही पिता, माता, घर और धन-ये ही मनुष्यों के निवासस्थान हैं। हे कुलश्रेष्ठ! सज्जन पुरुष इनमें आसक्त नहीं होते॥6॥ | ramayan सर्ग 2.108: जाबालि का नास्तिकों के मत का अवलम्बन करके श्रीराम को समझाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा ग्रामान्तरं गच्छन् नर: कश्चिद् बहिर्वसेत्।
उत्सृज्य च तमावासं प्रतिष्ठेतापरेऽहनि॥ ५॥
एवमेव मनुष्याणां पिता माता गृहं वसु।
आवासमात्रं काकुत्स्थ सज्जन्ते नात्र सज्जना:॥ ६॥
अनुवाद
जैसे कोई व्यक्ति दूसरे गाँव में जाते समय एक रात धर्मशाला में ठहरता है और अगले दिन उसे छोड़कर अपने अगले गंतव्य स्थान पर चला जाता है, वैसे ही पिता, माता, घर और धन-ये ही मनुष्यों के निवासस्थान हैं। हे कुलश्रेष्ठ! सज्जन पुरुष इनमें आसक्त नहीं होते॥6॥
‘Just as a person, while going to another village, stays in a Dharamshala for a night and leaves that place the next day and moves on to his next destination, similarly, father, mother, house and wealth are only the abodes of human beings. O most noble of the clans! Gentle men are not attached to these.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥