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तस्मान्माता पिता चेति राम सज्जेत यो नर:।
उन्मत्त इव स ज्ञेयो नास्ति कश्चिद्धि कस्यचित्॥ ४॥
अनुवाद
'इसलिए हे श्री राम! जो मनुष्य किसी को अपना माता या पिता मानकर उसमें आसक्त हो जाता है, उसे पागल ही समझना चाहिए, क्योंकि यहाँ कोई किसी का नहीं होता।॥4॥
'Therefore, Shri Ram! A person who gets attached to someone considering him/her as his/her mother or father should be considered as a mad person because here no one belongs to anyone.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥