Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.107.19: 'भारत! अद्वितीय बुद्धि वाले शत्रुघ्न तुम्हारी सहायता करें और सुमित्रा के यशस्वी पुत्र लक्ष्मण मेरे प्रधान मित्र (सहायक) बनें; हम चारों पुत्र अपने पिता राजा दशरथ के सत्य की रक्षा करें। तुम शोक न करो।'॥19॥ | ramayan सर्ग 2.107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रुघ्नस्त्वतुलमतिस्तु ते सहाय:
सौमित्रिर्मम विदित: प्रधानमित्रम्।
चत्वारस्तनयवरा वयं नरेन्द्रं
सत्यस्थं भरत चराम मा विषीद॥ १९॥
अनुवाद
'भारत! अद्वितीय बुद्धि वाले शत्रुघ्न तुम्हारी सहायता करें और सुमित्रा के यशस्वी पुत्र लक्ष्मण मेरे प्रधान मित्र (सहायक) बनें; हम चारों पुत्र अपने पिता राजा दशरथ के सत्य की रक्षा करें। तुम शोक न करो।'॥19॥
'Bharat! May Shatrughna, who has unparalleled wisdom, assist you and may the illustrious son of Sumitra, Lakshmana, be my chief friend (helper); may all four of us sons protect the truth of our father, King Dasharath. Do not be sad.'॥19॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे सप्ताधिकशततम: सर्ग:॥ १०७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें एक सौ सातवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १०७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥