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ramayan 2.107.13: मनुष्य को बहुत से गुणवान और विद्वान पुत्रों की कामना करनी चाहिए। क्या यह संभव है कि उनमें से कोई भी पुत्र गया की तीर्थयात्रा कर सके?॥13॥   |   ramayan सर्ग 2.107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.107.13 
एष्टव्या बहव: पुत्रा गुणवन्तो बहुश्रुता:।
तेषां वै समवेतानामपि कश्चिद् गयां व्रजेत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को बहुत से गुणवान और विद्वान पुत्रों की कामना करनी चाहिए। क्या यह संभव है कि उनमें से कोई भी पुत्र गया की तीर्थयात्रा कर सके?॥13॥
 
‘One should wish for many virtuous and learned sons. Is it possible that even one of those sons may undertake the pilgrimage to Gaya?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)