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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.107.11 
श्रूयते धीमता तात श्रुतिर्गीता यशस्विना।
गयेन यजमानेन गयेष्वेव पितॄन् प्रति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! ऐसा सुना जाता है कि बुद्धिमान और यशस्वी राजा गय ने गयादेश में यज्ञ करते समय अपने पूर्वजों के विषय में एक उक्ति कही थी।
 
'Father! It is heard that the wise and famous king Gaya, while performing a yajna in Gaya-desh, had said a saying in respect of his ancestors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)