श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.106.9 
धर्मबन्धेन बद्धोऽस्मि तेनेमां नेह मातरम्।
हन्मि तीव्रेण दण्डेन दण्डार्हां पापकारिणीम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'मैं धर्म के बंधनों से बंधा हुआ हूँ, इसलिए इस पापिनी और दण्डनीय माता को कठोर दंड नहीं देता।॥9॥
 
'I am bound by the shackles of Dharma, so I do not punish this sinful and punishable mother by severely punishing her.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)