श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.106.7 
न त्वामेवंगुणैर्युक्तं प्रभवाभवकोविदम्।
अविषह्यतमं दु:खमासादयितुमर्हति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'आप जो ऐसे उत्तम गुणों से संपन्न हैं और जन्म-मृत्यु का रहस्य जानते हैं, आपको असहनीय दुःख नहीं आ सकता। 7.
 
‘You who are endowed with such excellent qualities and know the secret of birth and death, unbearable suffering cannot come to you. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)