Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.106.4: जिस प्रकार मृतात्मा का शरीर आदि से कोई सम्बन्ध नहीं होता, उसी प्रकार जीवित रहते हुए भी वह उनसे सम्बन्ध रहित रहता है। जैसे किसी वस्तु के अभाव में उसके प्रति राग या द्वेष नहीं होता, उसी प्रकार उसके उपस्थित होने पर भी मनुष्य को राग या द्वेष से रहित होना चाहिए। ऐसी विवेक बुद्धि प्राप्त मनुष्य को दुःख क्यों होगा?॥4॥ | ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस प्रकार मृतात्मा का शरीर आदि से कोई सम्बन्ध नहीं होता, उसी प्रकार जीवित रहते हुए भी वह उनसे सम्बन्ध रहित रहता है। जैसे किसी वस्तु के अभाव में उसके प्रति राग या द्वेष नहीं होता, उसी प्रकार उसके उपस्थित होने पर भी मनुष्य को राग या द्वेष से रहित होना चाहिए। ऐसी विवेक बुद्धि प्राप्त मनुष्य को दुःख क्यों होगा?॥4॥
‘Just as a dead soul has no relation with his body etc., similarly, even while alive, he is devoid of any relation with them. Just as there is no attachment or aversion towards a thing in its absence, similarly, even when it is present, a person should be devoid of attachment or aversion. Why would a person who has attained such a discerning intellect suffer?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥