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ramayan 2.106.32: 'या यदि तुम मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दो और वन में चले जाओ तो मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी।'   |   ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.106.32 
अथवा पृष्ठत: कृत्वा वनमेव भवानित:।
गमिष्यति गमिष्यामि भवता सार्धमप्यहम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'या यदि तुम मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दो और वन में चले जाओ तो मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी।'
 
‘Or if you reject my request and go to the forest, I will also go with you.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)