श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.106.26 
इहैव त्वाभिषिञ्चन्तु सर्वा: प्रकृतय: सह।
ऋत्विज: सवसिष्ठाश्च मन्त्रविन्मन्त्रकोविदा:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'मंत्रज्ञ रघुवीर! मंत्रज्ञ महर्षि वशिष्ठ आदि सभी ऋषिगण, मंत्री, सेनापति और प्रजाजन आदि सभी यहाँ उपस्थित हैं। ये सभी लोग यहीं आपका राज्याभिषेक करें।' 26॥
 
‘Mantragya Raghuveer! The expert of mantras, Maharishi Vashishtha etc., all the sages, ministers, commanders and subjects etc. are all present here. All these people should coronate you here. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)