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ramayan 2.106.14: पिता जी ने क्रोध, मोह अथवा साहस के कारण उचित समझे जाने वाले धर्म का उल्लंघन किया है। कृपया इसे उलट दें - सुधारें॥14॥   |   ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.106.14 
साध्वर्थमभिसंधाय क्रोधान्मोहाच्च साहसात्।
तातस्य यदतिक्रान्तं प्रत्याहरतु तद् भवान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पिता जी ने क्रोध, मोह अथवा साहस के कारण उचित समझे जाने वाले धर्म का उल्लंघन किया है। कृपया इसे उलट दें - सुधारें॥14॥
 
‘Father has violated the Dharma, which he thought was right, out of anger, attachment or courage. Please reverse it – correct it.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)