Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.106.11: महाराज! मेरे गुरु, उत्तम यज्ञ करने वाले, ज्येष्ठ, राजा, पितर और देवता मेरे गुरु हुए हैं और इस समय वे परलोक सिधार गए हैं, इसलिए इस सभा में मैं उनकी निन्दा नहीं करता॥11॥ | ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गुरु: क्रियावान् वृद्धश्च राजा प्रेत: पितेति च।
तातं न परिगर्हेऽहं दैवतं चेति संसदि॥ ११॥
अनुवाद
महाराज! मेरे गुरु, उत्तम यज्ञ करने वाले, ज्येष्ठ, राजा, पितर और देवता मेरे गुरु हुए हैं और इस समय वे परलोक सिधार गए हैं, इसलिए इस सभा में मैं उनकी निन्दा नहीं करता॥11॥
‘Maharaj, my Guru, the one who performed the best Yagyas, the elders, the kings, the fathers and the gods have been my Gurus and at present they have gone to the other world, therefore in this gathering I do not criticise them.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥