Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.106.10: जिनका कुल और कर्म दोनों ही शुभ थे, ऐसे राजा दशरथ के यहाँ उत्पन्न होकर मैं धर्म-अधर्म को जानते हुए भी अपनी माता का वध करने का ऐसा कर्म कैसे कर सकता हूँ, जिसकी लोग निंदा करते हैं?॥10॥ | ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं दशरथाज्जात: शुभाभिजनकर्मण:।
जानन् धर्ममधर्मं च कुर्यां कर्म जुगुप्सितम्॥ १०॥
अनुवाद
जिनका कुल और कर्म दोनों ही शुभ थे, ऐसे राजा दशरथ के यहाँ उत्पन्न होकर मैं धर्म-अधर्म को जानते हुए भी अपनी माता का वध करने का ऐसा कर्म कैसे कर सकता हूँ, जिसकी लोग निंदा करते हैं?॥10॥
Being born of King Dasaratha, whose lineage and deeds were both auspicious, how could I, in spite of knowing what is right and wrong, commit the deed of killing my mother, which is condemned by the people?॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥