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ramayan 2.105.6: हे पृथ्वीपति! जैसे गधा घोड़े की चाल का अनुकरण नहीं कर सकता और अन्य साधारण पक्षी बाज की चाल का अनुकरण नहीं कर सकते, वैसे ही मुझमें आपके चलने के ढंग का, आपके अनुसरण करने के ढंग का अनुसरण करने की शक्ति नहीं है॥6॥   |   ramayan सर्ग 2.105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.105.6 
गतिं खर इवाश्वस्य तार्क्ष्यस्येव पतत्त्रिण:।
अनुगन्तुं न शक्तिर्मे गतिं तव महीपते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वीपति! जैसे गधा घोड़े की चाल का अनुकरण नहीं कर सकता और अन्य साधारण पक्षी बाज की चाल का अनुकरण नहीं कर सकते, वैसे ही मुझमें आपके चलने के ढंग का, आपके अनुसरण करने के ढंग का अनुसरण करने की शक्ति नहीं है॥6॥
 
‘Lord of the Earth! Just as a donkey cannot imitate the gait of a horse and other ordinary birds cannot imitate the gait of an eagle, similarly I do not have the strength to follow your way of moving about – your way of following.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)