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ramayan 2.105.46: सर्वशक्तिमान महात्मा श्री राम अपने छोटे भाई भरत से ये अर्थपूर्ण वचन कहकर पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए कुछ समय तक मौन रहे॥46॥   |   ramayan सर्ग 2.105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.105.46 
इत्येवमुक्त्वा वचनं महात्मा
पितुर्निदेशप्रतिपालनार्थम्।
यवीयसं भ्रातरमर्थवच्च
प्रभुर्मुहूर्ताद् विरराम राम:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
सर्वशक्तिमान महात्मा श्री राम अपने छोटे भाई भरत से ये अर्थपूर्ण वचन कहकर पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए कुछ समय तक मौन रहे॥46॥
 
Almighty Mahatma Shri Ram remained silent for a certain time after saying these meaningful words to his younger brother Bharat to obey his father's orders. 46॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे पञ्चाधिकशततम: सर्ग:॥ १०५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें एक सौ पाँचवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १०५॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)