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ramayan 2.105.41: 'मैं उसी स्थान पर रहूँगा जहाँ उन धर्मपरायण महाराज ने मुझे रहने की आज्ञा दी है और अपने पूज्य पिता की आज्ञा का पालन करूँगा ॥ 41॥   |   ramayan सर्ग 2.105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.105.41 
यत्राहमपि तेनैव नियुक्त: पुण्यकर्मणा।
तत्रैवाहं करिष्यामि पितुरार्यस्य शासनम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
'मैं उसी स्थान पर रहूँगा जहाँ उन धर्मपरायण महाराज ने मुझे रहने की आज्ञा दी है और अपने पूज्य पिता की आज्ञा का पालन करूँगा ॥ 41॥
 
'I will stay at the place where that pious Maharaja has ordered me to stay and I will obey the orders of my revered father. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)