Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.105.36: ‘बेटा! हमारे पिता ने दीर्घायु होकर तथा अन्य राजाओं की अपेक्षा उत्तम सुख भोगकर, श्रेष्ठ प्रजाजनों द्वारा सदैव आदर पाया है; अतः उनके मरने पर भी उनके लिए शोक करने योग्य नहीं है॥ 36॥   |   ramayan सर्ग 2.105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.105.36 
आयुरुत्तममासाद्य भोगानपि च राघव:।
न स शोच्य: पिता तात स्वर्गत: सत्कृत: सताम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! हमारे पिता ने दीर्घायु होकर तथा अन्य राजाओं की अपेक्षा उत्तम सुख भोगकर, श्रेष्ठ प्रजाजनों द्वारा सदैव आदर पाया है; अतः उनके मरने पर भी उनके लिए शोक करने योग्य नहीं है॥ 36॥
 
'Son! Our father, having lived a long life and enjoyed the best pleasures compared to other kings, has always been respected by the noble people; therefore, even after his death, he is not worthy of being mourned for.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)