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ramayan 2.104.22: तत्पश्चात् सीता ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से अपनी सभी सासों के चरणों में प्रणाम किया और उनके समक्ष खड़ी हो गईं।   |   ramayan सर्ग 2.104: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के द्वारा माताओं की चरणवन्दना तथा वसिष्ठजी को प्रणाम करके श्रीराम आदि का सबके साथ बैठना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 104: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के द्वारा माताओं की चरणवन्दना तथा वसिष्ठजी को प्रणाम करके श्रीराम आदि का सबके साथ बैठना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.104.22 
सीतापि चरणांस्तासामुपसंगृह्य दु:खिता।
श्वश्रूणामश्रुपूर्णाक्षी सम्बभूवाग्रत: स्थिता॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सीता ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से अपनी सभी सासों के चरणों में प्रणाम किया और उनके समक्ष खड़ी हो गईं।
 
Thereafter Sita, with tearful eyes, bowed to the feet of all her mother-in-laws and stood before them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)