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ramayan 2.104.18: सत्यपुरुष श्रेष्ठ श्री रामजी माताओं को देखकर ज्यों ही खड़े हुए, उन्होंने एक-एक करके उन सब के चरण और टखने स्पर्श किए॥18॥   |   ramayan सर्ग 2.104: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के द्वारा माताओं की चरणवन्दना तथा वसिष्ठजी को प्रणाम करके श्रीराम आदि का सबके साथ बैठना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 104: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के द्वारा माताओं की चरणवन्दना तथा वसिष्ठजी को प्रणाम करके श्रीराम आदि का सबके साथ बैठना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.104.18 
तासां राम: समुत्थाय जग्राह चरणाम्बुजान्।
मातॄणां मनुजव्याघ्र: सर्वासां सत्यसंगर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सत्यपुरुष श्रेष्ठ श्री रामजी माताओं को देखकर ज्यों ही खड़े हुए, उन्होंने एक-एक करके उन सब के चरण और टखने स्पर्श किए॥18॥
 
As soon as Shri Ram, the best man of truth, stood up after seeing the mothers, he touched the feet and ankles of all of them one by one. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)