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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन
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श्लोक 20
श्लोक
2.103.20
आनयेङ्गुदिपिण्याकं चीरमाहर चोत्तरम्।
जलक्रियार्थं तातस्य गमिष्यामि महात्मन:॥ २०॥
अनुवाद
'भैया! पिसे हुए इंगुदी फल और एक कपड़ा और धोती ले आना। मैं अपने परदादा को जल चढ़ाने जाऊँगा।'
‘Brother! Please bring the ground ingudi fruit and a cloth and a dhoti. I will go to offer water to my great father.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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