श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.103.19 
सान्त्वयित्वा तु तां रामो रुदतीं जनकात्मजाम्।
उवाच लक्ष्मणं तत्र दु:खितो दु:खितं वच:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शोकग्रस्त राम ने रोती हुई जनकपुत्री को सांत्वना देकर अत्यन्त दुःखी लक्ष्मण से कहा -
 
Thereafter, after consoling the weeping daughter of Janaka, the grief-stricken Rama said to the extremely sad Lakshmana -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)