श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.103.15 
सीते मृतस्ते श्वशुर: पितृहीनोऽसि लक्ष्मण।
भरतो दु:खमाचष्टे स्वर्गतिं पृथिवीपते:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'सीते! तुम्हारे ससुर का निधन हो गया। लक्ष्मण! तुम पितृहीन हो गए। भरत पृथ्वीपति महाराज दशरथ के निधन का दुःखद समाचार सुना रहे हैं। 15॥
 
'Seete! Your father-in-law passed away. Laxman! You became fatherless. Bharat Prithvipati Maharaj is telling the sad news of the demise of Dasharatha. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)