श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.103.11 
निष्प्रधानामनेकाग्रां नरेन्द्रेण विना कृताम्।
निवृत्तवनवासोऽपि नायोध्यां गन्तुमुत्सहे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'राजा दशरथ से रहित अयोध्या, प्रधान शासक के अभाव से अशांत और व्याकुल हो गई है; इसलिए वनवास से लौटने पर भी मेरे मन में अयोध्या जाने का कोई उत्साह नहीं रह गया है॥ 11॥
 
'Ayodhya, which has been devoid of King Dasharatha, has become restless and anxious due to lack of a chief ruler; therefore, even after returning from exile, I have no enthusiasm left in my mind to go to Ayodhya.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)