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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन
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श्लोक 1
श्लोक
2.103.1
तां श्रुत्वा करुणां वाचं पितुर्मरणसंहिताम्।
राघवो भरतेनोक्तां बभूव गतचेतन:॥ १॥
अनुवाद
पिता की मृत्यु के विषय में भरत द्वारा कहे गए दयनीय वचन सुनकर श्री राम शोक के कारण अचेत हो गए॥1॥
On hearing the pitiable words spoken by Bharata relating to the death of his father, Sri Rama became unconscious due to grief. ॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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