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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 102: भरत का पुनः श्रीराम से राज्य ग्रहण करने का अनुरोध करके उनसे पिता की मृत्यु का समाचार बताना
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श्लोक 7
श्लोक
2.102.7
उत्तिष्ठ पुरुषव्याघ्र क्रियतामुदकं पितु:।
अहं चायं च शत्रुघ्न: पूर्वमेव कृतोदकौ॥ ७॥
अनुवाद
'पुरुषसिंह! उठो और अपने पिता को जल दो। मैं और शत्रुघ्न उन्हें जल दे चुके हैं।'
'Purushasingh! Get up and offer water to your father. I and Shatrughna have already offered water to him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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