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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 101: श्रीराम का भरत से वन में आगमन का प्रयोजन पूछना, भरत का उनसे राज्य ग्रहण करने के लिये कहना और श्रीराम का उसे अस्वीकार कर देना
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श्लोक 7
श्लोक
2.101.7
सा राज्यफलमप्राप्य विधवा शोककर्शिता।
पतिष्यति महाघोरे नरके जननी मम॥ ७॥
अनुवाद
'इस कारण वह राज्य का फल न पाकर विधवा हो गई। अब मेरी माता शोक से दुर्बल होकर घोर नरक में जाएगी।'
‘Therefore she became a widow without getting the reward of the kingdom. Now my mother will be weakened by grief and will go to a terrible hell. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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