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ramayan 2.101.14: ऐसा कहकर कैकेयीपुत्र पराक्रमी भरत ने नेत्रों से आँसू बहाते हुए पुनः श्री रामजी के चरणों में सिर नवाया।   |   ramayan सर्ग 2.101: श्रीराम का भरत से वन में आगमन का प्रयोजन पूछना, भरत का उनसे राज्य ग्रहण करने के लिये कहना और श्रीराम का उसे अस्वीकार कर देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का भरत से वन में आगमन का प्रयोजन पूछना, भरत का उनसे राज्य ग्रहण करने के लिये कहना और श्रीराम का उसे अस्वीकार कर देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.101.14 
एवमुक्त्वा महाबाहु: सबाष्प: कैकयीसुत:।
रामस्य शिरसा पादौ जग्राह भरत: पुन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर कैकेयीपुत्र पराक्रमी भरत ने नेत्रों से आँसू बहाते हुए पुनः श्री रामजी के चरणों में सिर नवाया।
 
Having said this, the powerful Bharata, son of Kaikeyi, shedding tears from his eyes, once again bowed his head at the feet of Sri Rama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)