श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.100.62 
कच्चिदर्थेन वा धर्ममर्थं धर्मेण वा पुन:।
उभौ वा प्रीतिलोभेन कामेन न विबाधसे॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
'तुम धन से धर्म की या धर्म से धन की हानि नहीं करते? अथवा तुम मोह और लोभ के द्वारा धर्म और धन दोनों में बाधा नहीं डालते?
 
‘You do not harm religion through wealth or wealth through religion? Or do you not allow obstacles in both religion and wealth through attachment and greed?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)