श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.100.60 
कच्चिद् वृद्धांश्च बालांश्च वैद्यान् मुख्यांश्च राघव।
दानेन मनसा वाचा त्रिभिरेतैर्बुभूषसे॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
‘राघव! क्या आप वृद्धों, बालकों और प्रमुख वैद्यों का आन्तरिक स्नेह, मधुर वचन और धनदान से आदर करते हैं?॥60॥
 
‘Raghava! Do you respect the elderly, children and the chief physicians with inner affection, sweet words and donation of money?॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)