श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.100.6 
कच्चिन्नु धरते तात राजा यत् त्वमिहागत:।
कच्चिन्न दीन: सहसा राजा लोकान्तरं गत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भैया! महाराज तो जीवित हैं न? कहीं ऐसा तो नहीं कि वे बहुत दुखी थे और अचानक उनका निधन हो गया और इसीलिए तुम्हें स्वयं यहाँ आना पड़ा?
 
Brother! Maharaj is alive, isn't he? Could it be that he was very sad and suddenly passed away and that is why you had to come here yourself?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)