श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.100.53 
कच्चिद् दुर्गाणि सर्वाणि धनधान्यायुधोदकै:।
यन्त्रैश्च प्रतिपूर्णानि तथा शिल्पिधनुर्धरै:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
क्या आपके सभी किले धन, धान्य, अस्त्र, जल, यंत्र, शिल्पी और धनुर्धर सैनिकों से भरे हुए हैं?॥ 53॥
 
‘Are all your forts filled with wealth, grains, arms, water, machines, craftsmen and archer soldiers?॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)