vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना
»
श्लोक 53
श्लोक
2.100.53
कच्चिद् दुर्गाणि सर्वाणि धनधान्यायुधोदकै:।
यन्त्रैश्च प्रतिपूर्णानि तथा शिल्पिधनुर्धरै:॥ ५३॥
अनुवाद
क्या आपके सभी किले धन, धान्य, अस्त्र, जल, यंत्र, शिल्पी और धनुर्धर सैनिकों से भरे हुए हैं?॥ 53॥
‘Are all your forts filled with wealth, grains, arms, water, machines, craftsmen and archer soldiers?॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×