Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.100.51: ‘राजकुमार! क्या आप प्रतिदिन प्रातःकाल वस्त्राभूषणों से सुसज्जित होकर मुख्य मार्ग पर जाते हैं और नगरवासियों को दर्शन देते हैं?॥ 51॥   |   ramayan सर्ग 2.100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.100.51 
कच्चिद् दर्शयसे नित्यं मानुषाणां विभूषितम्।
उत्थायोत्थाय पूर्वाह्णे राजपुत्र महापथे॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
‘राजकुमार! क्या आप प्रतिदिन प्रातःकाल वस्त्राभूषणों से सुसज्जित होकर मुख्य मार्ग पर जाते हैं और नगरवासियों को दर्शन देते हैं?॥ 51॥
 
‘Prince! Do you go to the main road every morning, adorned with clothes and ornaments, and give darshan to the citizens of the city?॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)