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सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना
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श्लोक 51
श्लोक
2.100.51
कच्चिद् दर्शयसे नित्यं मानुषाणां विभूषितम्।
उत्थायोत्थाय पूर्वाह्णे राजपुत्र महापथे॥ ५१॥
अनुवाद
‘राजकुमार! क्या आप प्रतिदिन प्रातःकाल वस्त्राभूषणों से सुसज्जित होकर मुख्य मार्ग पर जाते हैं और नगरवासियों को दर्शन देते हैं?॥ 51॥
‘Prince! Do you go to the main road every morning, adorned with clothes and ornaments, and give darshan to the citizens of the city?॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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