श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.100.4 
क्व नु तेऽभूत् पिता तात यदरण्यं त्वमागत:।
न हि त्वं जीवतस्तस्य वनमागन्तुमर्हसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! आपके पिता कहाँ थे जो आप इस जंगल में आए? उनके जीवित रहते आप जंगल में नहीं आ सकते थे।'
 
‘Father! Where was your father that you came to this forest? You could not have come to the forest while he was alive.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)