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श्लोक 37
श्लोक
2.100.37
कच्चिद् व्यपास्तानहितान् प्रतियातांश्च सर्वदा।
दुर्बलाननवज्ञाय वर्तसे रिपुसूदन॥ ३७॥
अनुवाद
शत्रुसूदन! जिन शत्रुओं को आपने अपने राज्य से निकाल दिया है, यदि वे पुनः आ जाएँ, तो क्या आप उन्हें दुर्बल समझकर उनकी उपेक्षा करते हैं?॥ 37॥
'Shatrusudan! If the enemies whom you have expelled from your kingdom return, do you ignore them considering them to be weak?॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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