श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.100.36 
कच्चिदष्टादशान्येषु स्वपक्षे दश पञ्च च।
त्रिभिस्त्रिभिरविज्ञातैर्वेत्सि तीर्थानि चारकै:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम शत्रु पक्ष के अठारह (1) तीर्थस्थानों और अपने पक्ष के पन्द्रह (2) तीर्थस्थानों पर तीन-तीन अज्ञात गुप्तचरों द्वारा दृष्टि रखते हो या उनकी जाँच करते हो?॥ 36॥
 
‘Do you keep an eye on or investigate the eighteen (1) places of pilgrimage on the enemy's side and fifteen (2) places on your side through three unknown spies each?॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)