श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.100.34 
कच्चित् सर्वेऽनुरक्तास्त्वां कुलपुत्रा: प्रधानत:।
कच्चित् प्राणांस्तवार्थेषु संत्यजन्ति समाहिता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
क्या कुलीन कुलों में उत्पन्न हुए सभी मंत्री और अन्य बड़े अधिकारी आपसे प्रेम करते हैं? क्या वे एकनिष्ठ होकर आपके लिए प्राण त्यागने को तैयार हैं?॥ 34॥
 
‘Do all the ministers and other important officials born in noble families love you? Are they single-mindedly ready to sacrifice their lives for you?॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)