श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.100.24 
एकोऽप्यमात्यो मेधावी शूरो दक्षो विचक्षण:।
राजानं राजपुत्रं वा प्रापयेन्महतीं श्रियम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'यदि कोई मंत्री बुद्धिमान, वीर, चतुर और बुद्धिमान हो, तो वह राजा या राजकुमार को बहुत सारा धन प्राप्त करने में सहायता कर सकता है ॥ 24॥
 
'If a minister is intelligent, brave, clever and wise, he can help the king or the prince acquire a huge amount of wealth.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)