श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.100.10 
तात कच्चिच्च कौसल्या सुमित्रा च प्रजावती।
सुखिनी कच्चिदार्या च देवी नन्दति कैकयी॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘भैया! क्या माता कौशल्या प्रसन्न हैं? क्या सुमित्रा, जिनकी सुन्दर सन्तानें हैं, प्रसन्न हैं और क्या आर्या कैकेयी देवी भी प्रसन्न हैं?॥10॥
 
‘Brother! Is mother Kausalya happy? Is Sumitra, who has wonderful children, happy and is Arya Kaikeyi Devi also happy?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)