श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  2.10.5-6h 
अथ सा रुषिता देवी सम्यक् कृत्वा विनिश्चयम्॥ ५॥
संविवेशाबला भूमौ निवेश्य भ्रुकुटिं मुखे।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, क्रोध में भरी हुई देवी कैकेयी अपने कर्तव्य का पूर्ण निश्चय करके भौंहें टेढ़ी करके भूमि पर सो गईं। वे और क्या कर सकती थीं, वे तो विवश स्त्री थीं।
 
Thereafter, Goddess Kaikeyi, filled with anger, having fully decided on her duty, went to sleep on the ground with her eyebrows crooked. What else could she do, she was a helpless woman. 5 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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