श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  2.10.30-31h 
सन्ति मे कुशला वैद्यास्त्वभितुष्टाश्च सर्वश:॥ ३०॥
सुखितां त्वां करिष्यन्ति व्याधिमाचक्ष्व भामिनि।
 
 
अनुवाद
'भामिनी! मुझे अपना रोग बताओ। मेरे पास अनेक कुशल वैद्य हैं, जिन्हें मैंने सब प्रकार से संतुष्ट कर दिया है, वे तुम्हें प्रसन्न कर देंगे।'
 
‘Bhamini! Tell me your illness. I have many skilled doctors with me, whom I have satisfied in every way, they will make you happy. 30 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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