श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  2.10.17-18h 
स कामबलसंयुक्तो रत्यर्थी मनुजाधिप:॥ १७॥
अपश्यन् दयितां भार्यां पप्रच्छ विषसाद च।
 
 
अनुवाद
काम के बल से युक्त राजा रानी के सुख की वृद्धि करने की इच्छा से अन्दर गया। अपनी प्रिय पत्नी को वहाँ न देखकर उसे बड़ा दुःख हुआ और वह उसके विषय में पूछताछ करने लगा॥17 1/2॥
 
The king, armed with the force of lust, went inside with the desire to increase the pleasure of the queen. Not seeing his beloved wife there, he felt very sad and started making enquiries about her.॥ 17 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas