श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  2.10.16-17h 
स प्रविश्य महाराज: स्वमन्त:पुरमृद्धिमत्॥ १६॥
न ददर्श स्त्रियं राजा कैकेयीं शयनोत्तमे।
 
 
अनुवाद
अपने भव्य अन्तःकक्ष में प्रवेश करते हुए राजा दशरथ ने वहाँ सुन्दर शय्या पर लेटी हुई रानी कैकेयी को नहीं देखा।
 
Entering his opulent inner chamber, King Dasharatha did not see Queen Kaikeyi on the beautiful bed there. 16 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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