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ramayan 2.1.48: जल्दबाजी में, राजा दशरथ ने केकयराज और मिथिला नरेश जनक को भी नहीं बुलाया। उन्होंने सोचा कि उनके दोनों रिश्तेदारों को बाद में यह शुभ समाचार मिलेगा। 48.   |   ramayan सर्ग 2.1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.1.48 
न तु केकयराजानं जनकं वा नराधिप:।
त्वरया चानयामास पश्चात्तौ श्रोष्यत: प्रियम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जल्दबाजी में, राजा दशरथ ने केकयराज और मिथिला नरेश जनक को भी नहीं बुलाया। उन्होंने सोचा कि उनके दोनों रिश्तेदारों को बाद में यह शुभ समाचार मिलेगा। 48.
 
In his haste, King Dasaratha did not call the King of Kekayas or even Janaka, the King of Mithila. He thought that both his relatives would hear the good news later. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)