Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.1.41-42: ऐसा विचार करके और यह देखकर कि मेरे पुत्र श्री रामजी नाना प्रकार के असाधारण, सज्जन, असंख्य और दिव्य गुणों से सुशोभित हैं, जो अन्य राजाओं में दुर्लभ हैं, राजा दशरथ ने अपने मंत्रियों से परामर्श करके उन्हें युवराज बनाने का निश्चय किया ॥41-42॥ | ramayan सर्ग 2.1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा विचार करके और यह देखकर कि मेरे पुत्र श्री रामजी नाना प्रकार के असाधारण, सज्जन, असंख्य और दिव्य गुणों से सुशोभित हैं, जो अन्य राजाओं में दुर्लभ हैं, राजा दशरथ ने अपने मंत्रियों से परामर्श करके उन्हें युवराज बनाने का निश्चय किया ॥41-42॥
Having thought thus and having seen that his son Sri Ram was adorned with various kinds of extraordinary, gentlemanly, innumerable and transcendental qualities, which are rare in other kings, King Dasharatha, in consultation with his ministers, decided to make him the crown prince. ॥41-42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥