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ramayan 2.1.21: वह मंगल का जन्मस्थान, साधु, निर्धन, सत्यनिष्ठ और सरल था; उसने धर्म और अर्थ में निपुण वृद्ध ब्राह्मणों से उत्तम शिक्षा प्राप्त की थी॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 2.1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.1.21 
कल्याणाभिजन: साधुरदीन: सत्यवागृजु:।
वृद्धैरभिविनीतश्च द्विजैर्धर्मार्थदर्शिभि:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वह मंगल का जन्मस्थान, साधु, निर्धन, सत्यनिष्ठ और सरल था; उसने धर्म और अर्थ में निपुण वृद्ध ब्राह्मणों से उत्तम शिक्षा प्राप्त की थी॥ 21॥
 
He was the birthplace of auspiciousness, a saint, without poverty, truthful and simple; he had received the best education from aged Brahmins who were experts in Dharma and Artha.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)