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ramayan 2.1.19: राजकुमार श्री राम उत्तम गुणों से युक्त थे। अपने उत्तम गुणों के कारण वे प्रजा के द्वारा बाहर विचरण करने वाले प्राणी के समान प्रिय थे॥19॥   |   ramayan सर्ग 2.1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.1.19 
स तु श्रेष्ठैर्गुणैर्युक्त: प्रजानां पार्थिवात्मज:।
बहिश्चर इव प्राणो बभूव गुणत: प्रिय:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार श्री राम उत्तम गुणों से युक्त थे। अपने उत्तम गुणों के कारण वे प्रजा के द्वारा बाहर विचरण करने वाले प्राणी के समान प्रिय थे॥19॥
 
Prince Shri Ram was endowed with the best qualities. Because of his good qualities, he was loved by the subjects like a creature roaming outside.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)