Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.1.15: वे अत्यंत दयालु, क्रोध पर विजय पाने वाले और ब्राह्मणों के उपासक थे। दीन-दुखियों के प्रति उनकी बड़ी दया थी। वे धर्म के रहस्यों को जानते थे, सदैव अपनी इंद्रियों को वश में रखते थे और भीतर-बाहर से अत्यंत पवित्र थे।   |   ramayan सर्ग 2.1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.1.15 
सानुक्रोशो जितक्रोधो ब्राह्मणप्रतिपूजक:।
दीनानुकम्पी धर्मज्ञो नित्यं प्रग्रहवान् शुचि:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे अत्यंत दयालु, क्रोध पर विजय पाने वाले और ब्राह्मणों के उपासक थे। दीन-दुखियों के प्रति उनकी बड़ी दया थी। वे धर्म के रहस्यों को जानते थे, सदैव अपनी इंद्रियों को वश में रखते थे और भीतर-बाहर से अत्यंत पवित्र थे।
 
He was extremely compassionate, conqueror of anger and worshipper of Brahmins. He had great compassion for the poor and suffering. He knew the secrets of religion, always kept his senses under control and was extremely pure from inside and outside.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)