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ramayan 1.8.8: ‘महर्षिओ! मैं सदैव पुत्र के लिए शोक करता रहता हूँ। उसके बिना मुझे इस राज्य आदि से सुख नहीं मिलता; इसलिए मैंने निश्चय किया है कि पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान का अश्वमेध यज्ञ करूँगा॥8॥   |   ramayan सर्ग 1.8: राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 8: राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.8.8 
मम लालप्यमानस्य सुतार्थं नास्ति वै सुखम्।
तदर्थं हयमेधेन यक्ष्यामीति मतिर्मम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘महर्षिओ! मैं सदैव पुत्र के लिए शोक करता रहता हूँ। उसके बिना मुझे इस राज्य आदि से सुख नहीं मिलता; इसलिए मैंने निश्चय किया है कि पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान का अश्वमेध यज्ञ करूँगा॥8॥
 
‘Maharishis! I always keep mourning for a son. Without him I do not get happiness from this kingdom etc.; therefore I have decided that I will perform Ashwamedha Yajna to the Lord for getting a son.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)